
भागलपुर में कला, संस्कृति और रंगमंच का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। जहां तीन दिनों तक देश के विभिन्न राज्यों के कलाकार अपनी लोककला, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों से सिल्क सिटी की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देंगे।
दरअसल, संस्कृति के पक्ष में रंग ग्राम जन संस्कृति मंच के बैनर तले आयोजित होने वाले 13वें भागलपुर रंग महोत्सव 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजन समिति की बैठक आयोजित की गई। संस्था के महासचिव देवाशीष बनर्जी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में महोत्सव को सफल बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि तीन दिवसीय भागलपुर रंग महोत्सव का आयोजन 24 से 26 दिसंबर तक किया जाएगा। इस दौरान मणिपुर, असम, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

महोत्सव में अखिल भारतीय बहुभाषीय नाटक, स्थानीय नाटक, लोकनृत्य, शास्त्रीय नृत्य और मंजूषा पेंटिंग जैसी विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं की प्रस्तुतियां होंगी।
वहीं, महोत्सव का मुख्य आकर्षण रंग जुलूस होगा, जिसमें विभिन्न राज्यों के कलाकार अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए शहर की सड़कों पर देश की विविधता और सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करेंगे।
आयोजन समिति के महासचिव देवाशीष बनर्जी ने बताया कि बाहर से आने वाले कलाकारों के आवासन, भोजन और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी आयोजन समिति निभाएगी। बैठक में मौजूद सदस्यों और पदाधिकारियों ने आयोजन को भव्य और सफल बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव भी दिए।
इस मौके पर श्रीप्रकाश चौधरी, नारायण झा, मीडिया प्रभारी धीरज शर्मा, तरुण किरण, मोहम्मद तकी अहमद जावेद, तापस घोष, तरुण घोष, शांतनु गांगुली, महेश्वरी प्रसाद केसरी, पंकज कुमार सिंह, राजीव राज सिंह, विनोद कुमार रंजन, दीपक कुमार, रवि कुमार सिंह, सत्येंद्र भास्कर और सत्येंद्र कुमार मंडल सहित कई सदस्य मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, दिसंबर में आयोजित होने वाला भागलपुर रंग महोत्सव न सिर्फ रंगमंच और लोककलाओं को मंच प्रदान करेगा, बल्कि देश की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने का भी काम करेगा।
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