
भागलपुर। साहित्य, कला और रचनात्मकता का अनोखा संगम रविवार को भागलपुर में देखने को मिला। प्रेमचंद-शरतचंद्र कमेटी की ओर से आयोजित प्रेमचंद-शरतचंद्र स्मृति प्रतियोगिता 2026 के सफल प्रतिभागियों के लिए पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। प्रतियोगिता में 800 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया, जबकि समारोह के दौरान करीब 185 सफल प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
दरअसल, 13 सितंबर को आयोजित इस प्रतियोगिता में भागलपुर के सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कक्षा एक से लेकर स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। भाषण, निबंध लेखन, काव्य पाठ, गीत, चित्रांकन और क्विज के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया।

आयोजकों के अनुसार, प्रेमचंद-शरतचंद्र स्मृति प्रतियोगिता का आयोजन वर्ष 1997 से लगातार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को साहित्य और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना तथा महान साहित्यकार प्रेमचंद और शरतचंद्र की रचनाओं एवं विचारों से नई पीढ़ी को परिचित कराना है।
पुरस्कार वितरण समारोह में करीब 80 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही उन्हें प्रेमचंद और शरतचंद्र की साहित्यिक रचनाओं की पुस्तकें भी भेंट की गईं। गीत-संगीत की प्रस्तुतियों ने समारोह में और रंग भर दिया। बच्चों, अभिभावकों और साहित्य प्रेमियों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
समारोह का खास आकर्षण रंग ग्राम जन सांस्कृतिक मंच की नाट्य प्रस्तुति रही। मंच की ओर से प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की चर्चित रचना ‘मैं नरक से बोल रहा हूँ’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन कपिलदेव रंग ने किया, जबकि किरदार की भूमिका सुनील रंग ने निभाई। कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में प्रेमचंद-शरतचंद्र कमेटी के अध्यक्ष तापस घोष, सचिव रवि आनंद, संरक्षक तरुण घोष, उपाध्यक्ष श्री प्रकाश चौधरी, शांतनु गांगुली, दीपक कुमार, सुनील कुमार रंग, प्रणव रंग समेत कमेटी के दर्जनों सदस्य मौजूद रहे। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और अभिभावक भी समारोह में शामिल हुए।
कुल मिलाकर यह आयोजन साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और बच्चों व युवाओं की रचनात्मक प्रतिभा को मंच देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।






