
भागलपुर। अंतरराष्ट्रीय ख्याति के गांधीवादी विचारक राजगोपाल ने कहा कि मौजूदा सदी की चुनौतियों के समाधान में महात्मा गांधी के विचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में युद्ध और विनाश के माहौल के बीच भारत से विश्वशांति के लिए मार्गदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर दिशा ग्रामीण विकास मंच की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजगोपाल ने कहा कि कनाडा में परमाणु हथियारों के विरोध में चल रहे बड़े अभियान में गांधी विचार का प्रभाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने अफ्रीका में हुए शांति सम्मेलन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी विचार और स्वावलंबन के क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। भारत में रह रहे अफ्रीकी युवाओं को गांधी विचार से परिचित कराना भी जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि जापान, भारत, दक्षिण अफ्रीका, स्विट्जरलैंड, कनाडा और आर्मेनिया के सामाजिक संगठनों की भागीदारी से ‘P-7’ यानी पीस आधारित अंतरराष्ट्रीय पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनके अनुसार G-7 के मुकाबले P-7 में शांति और सामाजिक सरोकारों पर जोर रहेगा। Peace Builders Forum India भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय है।
राजगोपाल भागलपुर में गांधीजी के आगमन के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित गांधी उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान वरिष्ठ गांधीवादी डॉ. मनोज मीता द्वारा महात्मा गांधी की आत्मकथा के अंगिका अनुवाद का लोकार्पण किया जाएगा। साथ ही बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले पंजाब के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिओम जिंदल को गांधी सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
राजगोपाल सद्भावना यात्रा का नेतृत्व करने के साथ बांका के शोभनपुर गांधी आश्रम में गांधीजी की प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता डॉ. शंभू दयाल खेतान ने की। स्वागत डॉ. मनोज मीता और संचालन प्रसून लतांत ने किया।







