

नई दिल्ली, 30 सितंबर। UPI MDR को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंताओं के बीच AIMRA और AICPDF के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल के नेतृत्व में व्यापारियों की समस्याएं और सुझाव वित्त मंत्री के सामने रखे। इसमें AIMRA के फाउंडर चेयरमैन कैलाश लख्यानी भी शामिल रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त प्रतिवेदन सौंपकर प्रस्तावित UPI MDR को फिलहाल स्थगित करने की मांग की। संगठनों ने 0.40 प्रतिशत शुल्क को एकमुश्त लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करने का सुझाव दिया। प्रस्ताव के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसे 0.20 प्रतिशत से शुरू कर हर वर्ष 0.05 प्रतिशत बढ़ाकर 0.40 प्रतिशत तक ले जाने की बात कही गई।
इसके अलावा प्रस्तावित एक लाख रुपये की सीमा की समीक्षा कर इसे पांच लाख रुपये करने तथा मर्चेंट-टू-मर्चेंट (M2M) लेनदेन को MDR के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई। व्यापारिक संगठनों ने मुद्दे के समाधान के लिए विशेष समिति गठित करने का भी सुझाव दिया।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, वित्त मंत्री ने व्यापारियों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया। सरकार के आश्वासन और संवाद के बाद AIMRA एवं AICPDF ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रतीकात्मक ‘नो यूपीआई डे’ वापस लेने का निर्णय लिया है।







